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अंता उपचुनाव: क्या कांग्रेस को मिल सकता है ' अर्ली बर्ड बेनिफिट ' ?

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प्रकाशित  16 अक्टूबर 2025

राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो चुकी है। एक ओर जहां कांग्रेस ने स्पष्ट रणनीति के तहत अपना प्रत्याशी घोषित कर मैदान में उतरने का काम समय रहते कर लिया है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा अब भी उम्मीदवार तय करने की उधेड़बुन में फंसी हुई नज़र आ रही है।


कांग्रेस का पहला दांव: भाया की वापसी और नामांकन रैली का शक्ति प्रदर्शन

कांग्रेस ने प्रमोद जैन भाया को प्रत्याशी बनाकर यह साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी इस चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है। भाया के नाम का ऐलान समय रहते कर दिया गया और उसके बाद नामांकन के दिन एक बड़ी रैली का आयोजन कर राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी किया गया।

बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता एक जाजम पर एकजुट नजर आए, और खुद प्रमोद जैन भाया ने अपने धुआंधार भाषण में भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने विशेष तौर पर भाजपा और नरेश मीणा पर निशाना साधा।

भाया के भाषण की शैली और आक्रामक तेवर को लेकर कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी उनकी खुले मंच से सराहना की, जो यह दिखाता है कि पार्टी अंदरूनी तौर पर एकजुट और रणनीतिक रूप से सजग है।

भाजपा में मंथन जारी: चेहरा तय नहीं, समीकरणों में उलझन

वहीं भाजपा खेमे में स्थिति अभी साफ नहीं है। पार्टी अब तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं कर पाई है, जिससे कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मुलाकात हुई थी। इसके बाद पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी द्वारा वसुंधरा राजे से की गई मुलाकात को भी अंता उपचुनाव की दृष्टि से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि इन बैठकों के क्या नतीजे निकलेंगे, और भाजपा का अगला कदम क्या होगा , यह अब तक स्पष्ट नहीं है। पार्टी के भीतर कई नामों की चर्चा तो है, लेकिन एक ठोस निर्णय का इंतजार अभी बाकी है।

क्या कांग्रेस ने ले ली शुरुआती बढ़त?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में समय पर निर्णय लेना और संगठनात्मक तालमेल किसी भी दल की जीत का आधार होता है। इस नजरिए से देखा जाए तो कांग्रेस ने एक रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है। उम्मीदवार की घोषणा, नामांकन रैली और सांगठनिक एकजुटता ने कांग्रेस को मैदान में पहले उतार दिया है।

वहीं भाजपा संगठनात्मक और रणनीतिक स्तर पर अभी भी गुत्थियों में उलझी नजर आ रही है। क्या यह देरी पार्टी को भारी पड़ेगी या फिर अंतिम वक्त में कोई चौंकाने वाला दांव चलेगी , यह तो वक्त ही बताएगा।

निष्कर्ष: पहला कदम कांग्रेस का, भाजपा पर नजरें

अंता उपचुनाव राजस्थान की राजनीति में आने वाले समीकरणों की झलक दे सकता है। कांग्रेस ने मैदान में उतरकर पहला बड़ा कदम जरूर उठा लिया है, लेकिन भाजपा की चुप्पी और अंदरूनी मंथन अभी भी बाकी कहानी को अधूरा रखे हुए है।

राजनीतिक दृष्टि से यह कहना गलत नहीं होगा कि फिलहाल कांग्रेस के पास बढ़त है, लेकिन भाजपा कब और किस रूप में पलटवार करेगी , यही देखना दिलचस्प रहेगा।